जेवर हवाई अड्डे का ठेका मिला ज्यूरिख एयरपोर्ट को

अडानी समूह और दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड ने भी लगाई थी एयरपोर्ट के कॉन्ट्रैक्ट के लिए बोली


नई दिल्ली. ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी ने अडानी समूह और दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (डायल) को पछाड़ते हुए जेवर हवाई अड्डे के निर्माण को हासिल किया है। नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट लिमिटेड (नियाल) के ग्रेटर नोएडा स्थित कार्यालय में शुक्रवार को जेवर हवाई अड्डे के लिए निविदा खोली गईं। हवाई अड्डे के निर्माण कार्य के लिए कुल चार निविदाओं का चयन किया गया था। ज्यूरिख एयरपोर्ट ने अडानी समूह, डायल और एंकररेज इंफ्रास्टक्चर इंवेस्टमेंट होल्डिंग लिमिटेड को पछाड़ते हुए मोदी सरकार की उत्तर प्रदेश की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को हासिल किया।


दिल्ली का दूसरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट है जेवर एयरपोर्ट


जेवर हवाई अड्डे के लिए छह नवंबर को तकनीकी निविदा में डायल,ज्यूरिख एयरपोर्ट, एंकरेज और अडानी समूह की निविदाएं सफल घोषित की गईं थी। हवाई अड्डे के लिए निविदा प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद दो दिसंबर को उत्तर प्रदेश की परियाेजना निगरानी एवं क्रियान्वयन समिति (पीएमआईसी) की बैठक में चयनित कंपनी के बारे में जानकारी दी जाएगी। यह हवाई अड्डा दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में तीसरा एयरपोर्ट होगा। इससे पहले एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा दिल्ली का इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट और गाजियाबाद में हिंडन एयरपोर्ट है।


हवाई अड्‌डे पर बनेंगे आठ रनवे


पांच हजार हेक्टेयर में फैले जेवर हवाई अड्डा पर 29 हजार 560 करोड़ रुपए व्यय का अनुमान है। इस हवाई अड्डे में छह से आठ रनवे बनाए जाएंगे। पहले चरण में 4588 करोड़ रुपए व्यय आएगा। प्रथम चरण 1334 हेक्टेयर क्षेत्रफल में होगा और इसके 2023 तक पूरा होने की उम्मीद है। जेवर एयरपोर्ट का निर्माण पूरा हो जाने के बाद यह देश का सबसे बड़ा हवाई अड्डा होगा।


ज्यूरिख एयरपोर्ट ने लगाई प्रति व्यक्ति 400 रुपए बोली


एयरपोर्ट के लिए 30 मई को वैश्विक निविदा आमंत्रित की गई थी। यह पहले ही तय किया गया था कि हवाई अड्डा की निविदा में जो भी कंपनी प्रति यात्री अधिकतम राजस्व देगी उसे वरीयता दी जाएगी। ज्यूरिख ने 400.97 रुपए की प्रति यात्री सर्वाधिक बोली दी थी। डायल ने 351 रुपए, अडानी ने 360 रुपए और एनकोरेज ने 205 रुपए की निविदा दी थी। जेवर एयरपोर्ट के लिए जिला प्रशासन ने 84 फीसदी से अधिक जमीन का अधिग्रहण कर इसका कब्जा यमुना प्राधिकरण को दिला दिया है। शेष जमीन के लिए जिला प्रशासन की प्रक्रिया जारी है।